Color-Grading

Color grading प्रोसेस क्या है ? फिल्म में कलर-ग्रेडिंग प्रोसेस क्या होता है

Color grading and Color Correction

Color grading फिल्ममेकिंग की एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से इमेज या वीडियो
के कलर को सही किया जाता है ताकि अलग-अलग स्क्रीन पे सही कलर में वो इमेज/वीडियो दिखे।
एक इमेज या वीडियो का कलर काफी सारे बिंदुओं पे निर्भर करता है जैसे-Contrast,
Brightness, Highlight , Saturation , Black Level , Whiete-point, Detailing।
साधारण भाषा में अगर इसको बोला जाये तो जब फिल्म शूट होकर आती है तो
उसमे बिलकुल कलर नहीं होता है जिसे raw वीडियो भी बोलते हैं ।
प्रोफेशनल फिल्ममेकिंग में अक्सर raw वीडियो ही शूट होता है ।
उस वीडियो को एडिटिंग के बाद Color grading के लिए भेजा जाता है
ताकि उस वीडियो का जो ओरिजनल कलर है वो दिखे । Color grading में दो टर्म आते है
पहले है Color Correction और फिर आता है Color grading

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1.Color Correction :

कलर करेक्शन एक टेक्निकल प्रोसेस है जिसके अंदर इमेज या वीडियो फुटेज के कलर
प्रॉब्लम को ठीक कर के नेचुरल जाता है |
इस प्रोसेस में इमेज के अंदर जो भी ऑब्जेक्ट होता है उसके कलर को नेचुरल किया जाता है |
ताकि उस ऑब्जेक्ट का कलर एकदम रियल लगे | इसको Color Balancing या Normalization भी कहते हैं

Primary grading :

Primary grading में इमेज या वीडियो के Full Frame के ऊपर Color Correction प्रोसेस किया जाता है | Full Frame के
अंदर Brightness , Highlight ,Contrast,Saturation , Black Level , Whiete-point,ये सभी को control किया जाता है |

secondary  grading :

सेकेंडरी ग्रेडिंग में वीडियो या इमेज के किसी पार्ट को Mask कर के कलर को सही किया जाता है
जैसे अगर वीडियो-क्लिप का कलर ठीक है पर कही छोटे से भाग में Brightness ज्यादा है या
फिर Darkness है तो उस पार्ट को Mask कर लिया जाता है फिर सिर्फ उस पार्ट को ही Grading किया
जाता है इसे secondary  grading कहते हैं ये भी Color Correction के अंदर ही हैं ।

2.Color grading :

जब इमेज या वीडियो Color corrected हो गया तो उस इमेज या वीडियो को एक प्रॉपर लुक दिया जाता हैं
जिसे Film Look बोलते हैं । जितने भी अच्छी फिल्मे हैं खाशकर बड़ी बजट की
फिल्मे हैं उनमे आप देखेंगे पुरे फिल्म के अंदर बाकि फिल्मों से एक अलग लुक है ।
Film Look अक्सर फिल्म के कहानी के ऊपर उसके इमोशन के ऊपर
निर्भर करता है प्रोफेशनल तरीके में काफी सारे कलर-प्लेट बने हुए हैं की
किस तरह के इमोशन को कौन सा कलर रिप्रेजेंट करता है ।

अगर कोई फिल्म भूतिया है और उसमे खूब ज्यादा सेचुरेटेड कलर डाल दिया तो अच्छा नहीं दिखेगा
इस लिए फिल्म लुक पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है ।
फिल्म का लुक कैसा होगा ये फिल्म-निर्देशक कलर प्लेट बना कर देते हैं और जो
Colorist होता है उसके साथ इस काम को मॉनिटर करते है ।और ये प्रक्रिया
Color grading के अंदर आता है । अलग-अलग डिवाइस में वीडियो के कलर चेंज न हो
इसका भी ध्यान कलर grading प्रक्रिया के अंदर रखा जाता जाता है । काफी सारे
फैक्टर हैं जो इमेज के कलर को इम्पैक्ट करते हैं जैसे स्क्रीन-साइज, resolution ,
Color Space ये सारी चीजे के ऊपर ध्यान दिया जाता है ।

प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर्स कौन कौन से हैं ?

  • Baselight Color Grading – FilmLight
  • DaVinci Resolve 16 | Blackmagic Design
  • Vegas Pro Color
  • Final Cut Pro X
  • Premiere Pro cc
  • Media Composer -Avid Technology

ये सारे सॉफ्टवेयर्स हैं जो Color grading के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं |ये सॉफ्टवेयर्स
वीडियो क्लिप को Color grading करने के लिए इस्तेमाल होते हैं वहीं अगर
सिंगल इमेज को Color grading करना हो तो उसके लिए मुख्य रूप से Photoshop cc सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है ।
Color grading में और भी काफी टेक्नीकल टर्म हैं जिसके ऊपर ध्यान रखना होता है जैसे की वीडियो फुटेज किस कैमरा से शूट किया गया है,
वीडियो-क्लिप का फॉर्मेट क्या है, उस कैमरा का Color Space क्या है, जिस सॉफ्टवेयर में उस वीडियो को
प्रोसेस करना है वो उस फॉर्मेट को सपोर्ट करता है की नहीं या फिर उस सॉफ्टवेयर का कलर स्पेस उस कैमरा से मैच करता है की नहीं, ये सारी
टेक्निकल टर्म है इस पर ध्यान रखना जरूरी होता है ताकि ग्रेडिंग करने के बाद वीडियो की क्वालिटी कम न हो ।

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