Director Of Photography DOP

Director Of Photography(डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी ) क्या होता है ?

What Is Director Of Photography?

कैमरा और लाइट के डिपार्टमेंट के हेड को डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी DOP बोलते है |
DOP को ही सिनेमेटोग्राफर भी बोलते हैं । Director Of Photography ही ये फैसला लेता है की फिल्म के
कौन से सीन में क्या लाइट लगेगा , कौन से कैमरा का इस्तेमाल होगा कौन से सीन में क्या फ्रेम रेट होगा ।
DOP भी एक डायरेक्टर के तरह ही होता है लेकिन सिर्फ शूटिंग तक ही सिमित रहता है ।

किसी सीन को डायरेक्टर किस हिसाब से सोच रहा है उस चीज को समझना और उसको
कैमरे की मदद से परदे पे उतारना ये DOP (Director Of Photography) की मुख्य जिम्मेबारी होती है ।
शूटिंग के दौरान काफी चीजों के ऊपर ध्यान रखा जाता है जैसे आउटडोर में शूट हो रहा है तो वह पे लाइटिंग
कैसा होगा, क्या-क्या लाइट लगेगा उसको ध्यान में रखना, किस तरह के सीन शूट हो रही है
उसके हिसाब से लेंस का चुनाव करना ये डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी ही निर्णय करता है ।

डायरेक्टर सिर्फ DOP को ही बोल सकता है हमें इस सीन में ऐसा कैमरा एंगल चाहिए,
इतना डेप्थ ऑफ़ फील्ड चाहिए जो की एक अच्छी फिल्म के लिए बहुत महत्पूर्ण है
कौन से शॉट में किस प्रकार का कैमरा मूवमेंट चाहिए । फिर सिनेमाटोग्राफर (DOP)
उस हिसाब से अपने डिपार्टमेंट के लोग को निर्देश देता है पूरी चीजों को सेटअप के लिए ।
सिनेमेटोग्राफी बहुत ही कलात्मक जॉब है अभी तो फिल्मो में साउंड और डायलॉग की मदद से
सिनेमेटोग्राफी अगर थोड़ी कमजोर भी है तो काम चल जाता है
लेकिन पहले जो silent movie (मूक फिल्म) का जमाना था उसमे तो न साउंड होता था
न ही उस फिल्म में डायलॉग होता है वैसी परिस्थिति में एक सिनेमैटोग्राफर और
डायरेक्टर के लिए कठिन जॉब होता था फिल्म के कहानी के हिसाब से सीन को प्रेजेंट करना ।

Career In Cinematography

अगर हम सिनेमेटोग्राफी में करियर बनाने की बात करे तो सीधी बात है
डायरेक्टर और सिनेमेटोग्राफर में कोई ज्यादा फर्क नहीं होता है
डायरेक्टर पुरे फिल्म के सभी डिपार्टमेंट के ऊपर ध्यान रखता है और
पुरे फिल्म के लिए जिम्मेबार होता है जबकि सिनेमाटोग्राफर सिर्फ शूटिंग तक के लिए जिम्मेबार होता है ।
तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी कितना जिम्मेबारी वाला काम है
और कितना एक्सप्रिएंस की जरूरत है । सिनेमैटोग्राफी में करियर बनाने के लिए सबसे पहले अस्सिटेंट
फोटोग्राफर से शुरुआत करना होती है ये एक ऐसा जॉब है जो बिना अनुभव के संभव नहीं है
और एक्सप्रिएंस के लिए किसी को असिस्ट करना बहुत जरूरी है । इस डिपार्टमेंट में डायरेक्ट
सिनेमैटोग्राफर के पोस्ट पे जॉब लेना संभव नहीं है ।

How To Learn Cinematography

सिनेमैटोग्राफर के लिए सबसे जरूरी है इमेजिनेशन को समझना और ये चीज
बिना काम किये थ्योरी से संभव नहीं है ऐसा नहीं है की थ्योरी जरूरी नहीं है जिस
कैमरे से फिल्म शूट होती है वो कैमरा काफी एडवांस्ड होता है
उसके टेक्निकल पार्ट्स को समझना किस लोकेशन में कैमरा का कौन सा सेटिंग का इस्तेमाल होता है
इस चीज को समझना फिर फ्रेम रेट क्या होता है उसका सही उपयोग क्या है इस चीज को समझना बहुत जरूरी है ।

काफी सारे ऐसे फिल्म इंस्टिट्यूट हैं जो डिजिटल फिल्ममेकिंग कोर्स के अंदर सिनेमेटोग्राफी भी सिखाते है
और कई ऐसे भी इंस्टिट्यूट हैं जहॉ सिर्फ सिनेमेटोग्राफी सिखाता है।

“National School of Drama”(NSD) Delhi https://nsd.gov.in
 Film and Television Institute of India (FTII) Pune https://www.ftii.ac.in/
SATYAJIT RAY FILM & TELEVISION INSTITUTE (SRFTI) Kolkata http://srfti.ac.in/

अगर शुरू में कोई असिस्टेंट के तौर पे नहीं रखता है तो कोर्स कर के सीखना भी बेहतर होगा ।
आकर ऑपर्चुनिटी की बात करे तो डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी एक ऐसा पोस्ट है
जिसमे शूटिंग से लेकर स्टोरी टेलिंग तक की कला अपने आप विकसित हो जाती है|
सिनेमेटोग्राफर का हमेशा डिमांड रहता है बस वो एक्सप्रिएंस वाला होना चाहिए ।
हॉलीवुड में काफी ऐसे सिनेमैटोग्राफर हैं जो बाद में डायरेक्टर बन गए और बहुत बड़ी
फिल्मे किये हैं ।सिनेमैटोग्राफर के लिए दुनिया भर में कई एसोसिएशन हैं भी हैं
जो सिनेमाटोग्राफर के हक़ के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ।

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