Career in Film Industry

Film making me Career kaise banaye | Career in Film Industry

फिल्म-निर्माण इंडस्ट्री सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ने वाला इंडस्ट्री है | फिल्म एक ऐसी मनोरंजन का साधन है जिसका डिमांड कभी कम नहीं हो सकता है | सिनेमा देखने का माध्यम में जरूर बदलाव हुआ है , लोग सिनेमा या थिएटर में जाकर फिल्म देखने के वजाय अपने घर में टेलीविज़न, मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से ज्यादा देखना पसंद करते हैं | अगर आप भी इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहते हैं और फिल्म निर्माण में करियर कैसे बनाये इसके बारे में जानकरी पाना चाहते हैं तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें | (Career in Film Industry ) Film making me Career kaise banaye इसके बारे में इस पोस्ट में काफी डिटेल्स से जानकरी दी गई है |

Film making me Career kaise banaye | Career in Film Industry

( Career in Film Industry ) फिल्म निर्माण में करियर कैसे बनाएं ? इस सवाल को जानने से पहले हम ये जानेंगे की फिल्म कैसे बनती है | फिल्म-निर्माण की प्रक्रिया को जाने बिना आप ये निर्णय नहीं ले पाएंगे की आपको फिल्म निर्माण की डिपार्टमेंट में या किस जॉब रूचि है और किस प्रकार से करियर बना सकते हैं |

सबसे पहले इस पोस्ट में हम फिल्म निर्माण प्रक्रिया के बारे में जानते हैं –

फिल्म निर्माण एक कला है जिसको इस्तेमाल कर के किसी कहानी को फिल्म या
मोशन पिक्चर तैयार किया जाता है | फिल्म-निर्माण में कई तरह के तकनीक और प्रक्रिया
का इस्तेमाल किया जाता है |

फिल्म निर्माण के कई चरण होते हैं और उन सभी चरण के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट
होता है |

फिल्म निर्माण की प्रक्रिया मुख्य तीन चरणों में संपन्न होती है –

  • प्री-प्रोडक्शन
  • प्रोडक्शन
  • पोस्ट प्रोडक्शन

फिल्म निर्माण में प्री-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर कैसे बनाएं

प्री-प्रोडक्शन

फिल्म-निर्माण की सबसे पहली चरण प्री-प्रोडक्शन है | प्री-प्रोडक्शन प्रक्रिया में फिल्म के कहानी को लिखा जाता है और उसे प्रॉपर डायलॉग , करैक्टर , लोकेशन के साथ लिखा जाता है जिसे “स्क्रिप्ट राइटिंग” कहते हैं | स्क्रिप्ट राइटिंग जो व्यक्ति करता है उसे स्क्रिप्ट राइटर कहते हैं |

प्री-प्रोडक्शन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्री-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट होता है|

  • स्क्रिप्ट राइटर
  • स्टोरीबोर्डिंग आर्टिस्ट
  • फिल्म डायरेक्टर
  • लोकेशन मैनेजर

Career in Film Industry in Pre-production Department

स्क्रिप्ट राइटर:

अगर आप को कहानी लिखने में रूचि है तो आप एक स्क्रिप्ट राइटर बन सकते हैं | स्क्रिप्ट राइटर बनने के लिए क्या-क्या तैयारी करना होता है , कहाँ तक पढ़ाई करना होता है , स्क्रिप्ट राइटर बनने के लिए कोर्स कहाँ से करना होता है इन सब के बारे में डिटेल्स से एक पोस्ट लिखी गई है | स्क्रिप्ट राइटर कैसे बने इस लिंक के ऊपर क्लिक कर के पूरी जानकरी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं |

स्टोरीबोर्डिंग आर्टिस्ट:

स्टोरी बोर्डिंग आर्टिस्ट फिल्म के स्क्रिप्ट को एक विजुअल रूप देता है | स्टोरी बोर्ड के माध्यम से फिल्म निर्देशक को और एक्टर को एक आईडिया मिल जाता है की इस सीन को किस प्रकार से किया जा सकता है | अगर आप स्टोरी बोर्ड के बारे में और ज्यादा डिटेल्स से जानना चाहते हैं तो स्टोरी बोर्ड क्या होता है लिंक पे क्लिक कर के पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |

फिल्म डायरेक्टर:

फिल्म निर्देशक फिल्म निर्माण प्रक्रिया में सबसे मुख्य होते हैं | फिल्म डायरेक्टर फिल्म निर्माण प्रक्रिया के सभी डिपार्टमेंट में होते हैं | अगर आप फिल्म डायरेक्टर बनना चाहते हैं तो आपको फिल्म निर्माण कोर्स करना होगा और फिल्म निर्माण के प्रक्रिया के सभी चरणों के बारे में काफी डिटेल्स से नॉलेज रखना होगा | फिल्म डायरेक्टर कैसे बन सकते हैं इस लिंक को क्लिक कर के फिल्म डायरेक्टर बनने की प्रक्रिया के बारे में और फिल्म डायरेक्टर बनने के लिए कोर्स कहाँ से करें इसके बारे में पूरी जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |

लोकेशन मैनेजर:

फिल्म इंडस्ट्री में लोकेशन मैनेजर का काम फिल्म शूटिंग लोकेशन को ढूँढना और उसे उपलब्ध कराना होता है | अगर आप लोकेशन मैनेजर के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में जॉब पाना चाहते हैं तो आपको अलग-अलग लोकेशन के बारे समझ और जानकारी होना आवश्यक है |

लोकेशन मैनेजर का क्या काम होता है इस पोस्ट के मदद से लोएक्टिव मैनेजर के जॉब के बारे में और ज्यादा जाकरि प्राप्त कर सकते हैं |

प्री-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर बनाने के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग, फिल्ममेकिंग, स्टोरीबोर्डिंग
फिल्म डायरेक्टर का प्रशिक्षण लेकर फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं|

फिल्म निर्माण में प्री-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर कैसे बनाएं

प्रोडक्शन

फिल्ममेकिंग का दूसरा चरण होता है प्रोडक्शन | प्रोडक्शन प्रोसेस के अंदर
फिल्म का सेट तैयार किया जाता है और फिल्म की शूटिंग की जाती है |

प्रोडक्शन की प्रक्रिया पूरा करने के लिए प्रोडक्शन डिपार्टमेंट होता है:

  • डायरेक्टर
  • एक्टर
  • मेकअप आर्टिस्ट
  • लाइटिंग आर्टिस्ट
  • प्रोडक्शन मैनेजर
  • आर्ट डायरेक्टर
  • सेट आर्टिस्ट
  • सिनेमेटोग्राफर
  • स्पेशल इफ़ेक्ट आर्टिस्ट

How to start career in filmmaking production department

डायरेक्टर:

फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में फिल्म निर्देशक जिसे फिल्म डायरेक्टर भी बोलते हैं ये सभी चरणों में मौजूद होते हैं | फिल्म निर्देशक का काम पूरी फिल्म को निर्देशित करना और कहानी के हिसाब से फ़िल्मको शूटिंग करवाना होता है | फिल्म की कहानी स्क्रिप्ट राइटर के द्वारा लिखी होती है लेकिन उसको विजुअल रूप देना डायरेक्टर का काम होता है |

एक्टर :

एक्टर का काम फिल्म मे किसी चरित्र को निभाना होता है जिसे अभिनय कहते हैं | एक्टर कैसे बने इस पोस्ट में काफी डिटेल्स में एक्टिंग से जुडी जानकरी दी गई है | अगर और ज्यादा जानकरी पप्राप्त करना चाहते हैं तो लिंक पे क्लिक कर के आसानी से जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |

मेकअप आर्टिस्ट:

मेकअप आर्टिस्ट का फिल्म मे एक्टर और एक्ट्रेस को मेकअप करना होता है | फ़िल्म के कहानी के पात्र जिस तरह का होना चाहिए उसी तरह का लुक तैयार करना और एक्टर उसी लुक के हिसाब से मेकअप करना मेकअप आर्टिस्ट का काम होता है |

लाइटिंग आर्टिस्ट:

लाइटिंग आर्टिस्ट का काम फिल्म के सेट पे लाइटिंग करना होता है | फ़िल्म का सेट सीन के हिसाब से तैयार होता है | फिल्म के सेट पे नेचुरल लाइट नहीं होता है वहां पे आर्टिफीसियल लाइट का प्रयोग किया जाता | किस सीन में कौन से लाइट के इस्तेमाल किया जाये ये लाइटिंग आर्टिस्ट और सिनेमेटोग्राफर (डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी ) निर्णय लेता है |

प्रोडक्शन मैनेजर :

फिल्म निर्माण प्रक्रिया काफी जटिल प्रक्रिया होती है इसी लिए इसमें अलग-अलग लोगो अलग-अलग काम दिए जाते हैं | प्रोडक्शन मैनेजर का काम पूरी प्रोडक्शन प्रोसेस को मैनेज करना होता है | प्रोडक्शन डिपार्टमेंट अगर कसी भी चीजों की आवश्यकता होती है तो वो प्रोडक्शन मैनेजर की जिम्मेबारी होती की उस चीज को बिना किसी देरी की उपलब्ध कराये | फिल्म शूटिंग में कसी भी प्रकार का रुकावट नहीं हो इसके लिए प्रोडक्शन मैनेजर हमेशा तैयार रहते हैं |

आर्ट डायरेक्टर:

फिल्म के सेट कोटियार करना सीन के हिसाब से लोकेशन को तैययर करना आर्ट डायरेक्टर का काम होता है| अगर फिल्म किसी कमरे में शूट हो रही है तो उस सीन में परिस्थिति के हिसाब से किन-किन चीजों का होना आवश्यक है उन सब चीजों सही जगह व्यबस्थित करना आर्ट डायरेक्टर काम होता है |

मान लें , अगर कोई सीन रूम के अंदर शूट हो रही है और स्क्रिप्ट में अलार्म बजने की घटना के बारे में लिखा हुआ है तो उस अलार्म को शूटिंग से पहले सही जगह व्यवस्थित करना आर्ट डायरेक्टर का काम होता है |

सेट आर्टिस्ट:

फिल्म सेट को तैयार करना सेट आर्टिस्ट का काम होता है |

सिनेमेटोग्राफर

सिनेमेटोग्राफर का काम फ़िल्म के सीन को शूट करना होता है | कैमरा को किस जगह पे रखा जाये ताकि सही से फ्रेम सेट हो सके ये सभी ध्यान सिनेमेटोग्राफर रखता है |

सीन शूट करने में कई तरह के टेक्नोलॉजी का प्रयोग होता है उन सब की जानकरी सिनेमेटोग्राफर को रखना होता है | जैसे : फिल्म किस फ्रेम रेट पे शूट होगा , फिल्म के किस सीन को कौन से लेंस का इस्तेमाल करना है और भी कई तरह की टेक्निकल चीजे हैं जिनकी जानकरी सिनेमाटोग्रापर को रखना होता है |

अगर आप सिनेमाटोग्राफी में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो सिनेमेटोग्राफर कैसे बने इस लिंक पे क्लिक करौर भी जायदा डिटेल्स में जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |जरूर आपको इस पोस्ट को पढ़ना चाहिए |

स्पेशल इफ़ेक्ट आर्टिस्ट:

फ़िल्म के तरह के फिक्शन करैक्टर भी होते हैं जिन्हे स्पेशल इफेक्ट्स के मदद से तैयार किया जाता है | प्रोस्थेटिक मेकअप के मदद से स्पेशल इफेक्ट्स तैयार किया जाता है | जैसे अगर करैक्टर का हाथ या पैर पे चोट के निशान दिखाना हो या बॉडी के कसी भी पार्ट पे कट का निशान दिखना हो तो ये सभी चीजें प्रोस्थेटिक मेकअप के मदद से तैयार की जाती है |

प्रोस्थेटिक मेकअप क्या है इस लिंक पे क्लिक कर के प्रोस्थेटिक मेकअप के बारे में और ज्यादा डिटेल्स से जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |

प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर बनाने के लिए डायरेक्शन,सिनेमेटोग्राफी,एक्टिंग,स्पेशल इफेक्ट्स, मेकअप आर्टिस्ट,लाइटिंग आर्टिस्ट का प्रशिक्षण ले सकते हैं , और अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं |

फिल्म निर्माण में पोस्ट-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर कैसे बनाएं

पोस्ट-प्रोडक्शन

पोस्ट-प्रोडक्शन फिल्म निर्माण की आखिरी चरण होता है | पोस्ट-प्रोडक्शन प्रक्रिया के
अंदर फिल्म के ऑडियो ,वीडियो एडिटिंग और कलर ग्रेडिंग की जाती है | अगर कुछ
विजुअल इफेक्ट्स इस्तेमाल करना हो तो वो भी फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन प्रक्रिया में
की जाती है |

पोस्ट-प्रोडक्शन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पोस्ट-प्रोडक्शन डिपार्टमेंट होता है :

  • फिल्म एडिटर
  • VFX आर्टिस्ट
  • Colorist
  • साउंड इफेक्ट्स आर्टिस्ट

How to start career in filmmaking Post-production department

फिल्म एडिटर:

फिल्म शूट होने के बाद उसकी एडिटिंग की जाती है जोकि फिल्म एडिटर करता है | फिल्म एडिटिंग सॉफ्टवेयर के मदद से फ़िल्म को एडिट की जाती है|

अगर आप भी फिल्म एडिटर बनना चाहते हैं तो फिल्म एडिटर कैसे बने इस पोस्ट को पढ़ें इस पोस्ट में कफी डिटेल्स जानकरी दी गई है|

विजुअल इफेक्ट्स आर्टिस्ट (VFX Artist ):

फिल्म के सीन में अगर बैकग्राउंड बदलना हो या किसी सीन में कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी (CGI) का इस्तेमाल करना हो तो विजुअल इफेक्ट्स के मदद से किया जाता है | सीन को ग्रीन स्क्रीन पे शूट किया जाता है और फिर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के मदद से उसे पोस्ट प्रोडक्शन में कम्पोज़िटिंग किया जाता है |

विजुअल इफेक्ट्स आर्टिस्ट कैसे बने इस पोस्ट के अंदर काफी डिटेल्स में जानकरी लिखी हुई है अगर आप विजुअल इफेक्ट्स आर्टिस्ट बनना चाहते हैं तो उस पोस्ट को पढ़ के और भी जानकरी प्रपात कर सकते हैं |

Colorist :

फिल्म के सीन को सिनेमाटिक लुक देने के कलर ग्रेडिंग टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है | कलर ग्रेडिंग क्या है इस लिंक पे क्लिक कर के कलर ग्रेडिंग के बारे में और ज्यादा डिटेल्स से जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |

साउंड इफेक्ट्स आर्टिस्ट:

फिल्म जितने भी प्रकार के साउंड होते हैं उन सभी साउंड को साउंड इफेक्ट्स आर्टिस्ट के द्वारा तैयार किए जाता है | फिल्म अगर वर्षा हो रही है तो उसकी आवाज , हवा की आवाज ,झरने की आवाज , और भी अन्य जो भी आवाजें होती है उन सभी को कृत्रिम तरिके से तैयार किया जाता है उसको एडीटिंग के माध्यम से इस्तेमाल किया जाता है |

साउंड इफेक्ट्स आर्टिस्ट क्या काम करता है इस लिंक कॉलिक कर के और ज्यादा डिटेल्स में जानकरी प्राप्त कर सकते हैं |

प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में करियर बनाने के लिए डायरेक्शन,ऑडियो ,वीडियो एडिटिंग और कलर ग्रेडिंग
और विजुअल इफेक्ट्स का प्रशिक्षण लिया जा सकता है और अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं |

फिल्म निर्माण में करियर बनाने के लिए इन सभी डिपार्टमेंट में से किसी एक
डिपार्टमेंट का ट्रेनिंग ले कर शुरुआत किया जा सकता है | काफी सारे फिल्म इंस्टीटूशन्स हैं
जहाँ से फिल्म मेकिंग का कोर्स कर सकते हैं |

फिल्ममेकिंग का डिग्री और डिप्लोमा दोनों तरह के कोर्स उपलब्ध है, इसलिए हाई स्कूल
कम्पलीट करने के बाद किसी अच्छे इंस्टीटूशन से कोर्स कर के फिल्म इंडस्ट्री में अपना
करियर बना सकते हैं |

ये भी देखें : 12वीं पास करने के बाद फिल्म निर्माण के क्षेत्र में शानदार करियर बना सकते हैं

फिल्म स्कूल की सूचि :

  • Film and Television Institute of India, Pune
  • Satyajit Ray Film and Television Institute (SRFTI) Kolkata
  • Whistling Woods International, Mumbai
  • National Institute of Design (NID), Ahmadabad
  • Asian Academy of Film and Television
  • L V Prasad Film And TV Academy, Chennai

फिल्ममेकिंग का कोर्स पुरी करने के बाद आप इन सभी जॉब में करियर की शुरुआत कर सकते हैं |

स्क्रिप्ट राइटर (Script writer)

डायरेक्टर (Director)

अभिनेता /अभिनेत्री (Actor)

असिस्टेंट डायरेक्टर (Assistant Director)

कास्टिंग डायरेक्टर (Casting Director)

आर्ट डायरेक्टर (Art director)

मेकअप आर्टिस्ट (Makeup artist)

कोरियोग्राफर (choreographer)

लोकेशन मेनेजर (Location manager)

प्रोडक्शन मेनेजर (Production manager)

प्रोडक्शन डिज़ाइनर (Production designer)

सेट डिज़ाइनर (Set designer)

सिनेमेटाग्राफर (Cinematographer )

साउंड इफेक्ट्स आर्टिस्ट (Sound Effects Artist )

डबिंग आर्टिस्ट (Dubbing Artist )

फिल्म एडिटर (Film Editor)

कलर ग्रेडिंग आर्टिस्ट्स (Colorist)

फिल्म स्कूल से कोर्स करने के बाद शुरुआत में काम मिलने में थोड़ी परेशानी हो सकती
है | फिल्म इंडस्ट्री में आसानी से काम पाने के लिए पोर्टफोलियो होना बहुत जरूरी होता है|

अक्सर फिल्म प्रोडक्शन कंपनी लोगो को पिछले कामों के आधार पे ही अपने कंपनी के अंदर
काम देते हैं इसीलिए पोर्टफोलियो का होना काफी आवश्यक है |

पोर्टफोलियो बनाने के लिए शॉर्ट-फिल्म में काम कर सकते हैं| शॉर्ट-फिल्म काफी अच्छा माध्यम है इसके मदद से लोकप्रियता
और काम दोनों आसानी से मिल सकता है |

ये भी देखें : शॉर्ट फिल्म कैसे बनाएं

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